पतंजलि के योगसूत्र में योग की गूढ़ अवधारणाओं को सरल और व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया है। योगसूत्र में चित्त की विभिन्न अवस्थाओं और विक्षेपों को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न साधन बताए गए हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है पंचक्लेश , जो मनुष्य के दुखों और बाधाओं के मूल कारणों की व्याख्या करता है। पतंजलि के अनुसार , जब तक इन क्लेशों का निवारण नहीं किया जाता , तब तक व्यक्ति आत्मज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। पंचक्लेश की परिभाषा संस्कृत में " क्लेश " का अर्थ होता है दुख , कष्ट या पीड़ा । योगसूत्र (2.3) में कहा गया है : " अविद्यास्मितारागद्वेषाभिनिवेशाः क्लेशाः। " अर्थात , पाँच प्रकार के क्लेश होते हैं — अविद्या , अस्मिता , राग , द्वेष और अभिनिवेश । ये क्लेश व्यक्ति के मन में विक्षेप उत्पन्न कर उसे बंधन में डालते हैं और जीवन में अज्ञान व दुःख का कारण बनते हैं। पंचक्लेश- 1. अविद्या ( अज्ञान ) अविद्या क्षेत्रमुत्तरेषां प्रसुप्ततनुवि...